The video, presented by Pratik Chaudhari, discusses a significant legal topic regarding the Right to Information (RTI) and introduces an alternative legal provision that can expedite the process of obtaining information from government authorities.
Introduction
Main Topic
Legal Framework
Practical Implications
Legal Advice
Conclusion and Call to Action
"न्याय में देरी होना अन्याय के समान है" (Delay in justice is akin to injustice).
The video effectively addresses a critical gap in the RTI process and offers a practical legal solution for individuals seeking timely information from government bodies. Pratik Chaudhari's clear explanations and legal insights empower viewers to take action and navigate the complexities of information access with confidence.
साथियों नमस्कार मैं प्रतीक चौधरी एडवोकेट चौधरी लीगल एसोसिएट से आप सब प्रणाम करता हूं नमस्कार करता हूं आज हम एक बहुत ही इंपोर्टेंट सब्जेक्ट पर आज का वीडियो लेकर के आए हैं जिसका टॉपिक ऐसा है जो आप चाह रहे थे वर्षों से जो आप चाह रहे थे वर्षों से जो आप देख रहे थे कि काश ऐसा हो जाए उस काश का इलाज आज हम आपके पास लेकर आए हैं कसा हो कि आपको सूचना जो है आरटीआई आवेदन जो है आपको आरटीआई का आवेदन भी ना करना पड़े और आपको आरटीआई आवेदन की दी गई समय सीमा का इंतजार भी ना करना पड़े आप सीधे सूचना प्राप्त कर पाएं तुरंत प्राप्त कर पाए तत्काल प्राप्त कर पाएं अगर ऐसा हो जाए तो कैसा हो जी हां आज हम इसी पर बात करेंगे आज हम आपके लिए लेकर आए हैं कानून जिसको आम भाषा में कहा जाता है आरटीआई का बाप आज का विषय बहुत ही इंपोर्टेंट बहुत ही महत्व पूर्ण मैं आप सब लोगों से एक निवेदन करना चाहूंगा कि वीडियो को आप पूरा देखें स्किप ना करें आगे पीछे करके ना देखें अन्यथा आपकी समझ में नहीं आएगा और आप लोगों के सवाल छूट जाएंगे वीडियो को पूरा देखें और वीडियो शुरू करने से पहले मेरी रिक्वेस्ट है कि जो लोग मेरे चैनल पर नए हैं वह सब्सक्राइब कर ले जिससे कि रोज हमारे लीगल अपडेट्स आप लोगों तक पहुंचते रहे मैक्सिमम शेयर करें ज्यादा से ज्यादा शेयर करें जिससे कि एक जरूरतमंद आदमी की मदद आपके जरिए हो सके मेरे जरिए हो सके मैं जो वीडियो बना रहा हूं उस आम आदमी तक त पहुंचे उसकी मदद हो सके इस महत्त्वपूर्ण काम में आप एक चेन का सिस्टम निभा सके इसलिए शेयर करिए चलिए ज्यादा समय ना लेते हुए शुरू करते हैं आज का वीडियो आज का जो हम टॉपिक लेकर आए हैं वह हम लेकर आए हैं इतना इंपोर्टेंट टॉपिक मेरे जो जो मेरे सब्सक्राइबर है जो मेरे व्यूवर्स हैं वह लगातार मुझसे सवाल कर रहे थे कि सर आरटीआई का आवेदन दिया है 30 दिन हो गए सूचना अधिकारी ने सूचना नहीं दी तो मैंने उनको बताया कि आप इसकी फर्स्ट अपील सेक्शन 19 में कर सकते हैं तो उन्होंने अपील भी की फिर कई लोगों के मुझे सवाल आए कि सर सेक्शन 19 में हमने अपील भी कर दी जवाब नहीं मिला तो मैंने कहा आपके पास आखिरी विकल्प सूचना अधिकार अधिनियम के तहत जो बचता है लास्ट ऑप्शन जिसको कहते हैं वह अंतिम अपील जो राज्य सूचना आयोग या केंद्रीय सूचना आयोग में होती है आपके पास विकल्प बचता है राज्य सूचना आयोग या केंद्रीय सूचना आयोग में जाकर के अपील फाइल करने का बहुत सारे लोगों ने अपील फाइल कर रखी है लेकिन आयोगों में सूचना अधिकार अधिनियम के तहत इतनी भीड़ इकट्ठा हो चुकी है राज्य सूचना आयोग हो या केंद्रीय सूचना आयोग हो इतनी लंबी पेंडेंसी है कि साल साल दो साल ढाई साल तीन सालों में नंबर आ रहे हैं तो इतने लंबे समय में सूचना मिलना जो है सूचना अधिकार का कहीं ना कहीं दम घुट रहा है इन चीजों से सूचना समय पर ना मिलना यह बहुत ही एक गंभीर विषय है और कई बार माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि न्याय में देरी होना अन्याय के समान है इसलिए हम आज आपके पास लेकर के आए हैं एक ऐसा कानून जो आपके पास था वर्षों से था लेकिन आपको एहसास नहीं था आपको पता नहीं था हमने बहुत मेहनत करके बड़े प्रयासों से इसको खोजा है आज आपसे डिस्कस कर रहे हैं जी हां हम बात कर रहे हैं भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जो आपने सुना होगा इंडियन एविडेंस एक्ट इसको कहते हैं लंबे समय से भारतीय न्याय प्रणाली में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता चला आ रहा है किसी भी केस का निस्तारण होने से पहले कोर्ट में जो गवाही होती है वह इंडियन एविडेंस एक्ट के तहत होती है कोई भी केस में गवाह बनता है वो इंडियन एविडेंस एक्ट के तहत बनता है इंडियन एविडेंस एक्ट भारतीय जो न्याय व्यवस्था है उसका महत्त्वपूर्ण हिस्सा है इंडियन एविडेंस एक्ट का सेक्शन 74 यह कहता है कि कोई भी व्यक्ति कोई भी सरकारी व्यक्ति किसी कार्य को करने के दौरान जो डॉक्यूमेंट इकट्ठे करता है या जो डॉक्यूमेंट को बनाता है वे डॉक्यूमेंट जनरल डॉक्यूमेंट कहलाएंगे सुन लीजिए फिर से सेक्शन 74 इंडियन एविडेंस एक्ट भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत जो भी कर्मचारी या अधिकारी कोई डॉक्यूमेंट किसी से कलेक्ट कर रहा है या बना रहा है वो सारे डॉक्यूमेंट जनरल डॉक्यूमेंट कहलाएंगे और जनरल डॉक्यूमेंट जो हैं वह आपके सूचना अधिकार के दायरे में भी आते हैं और यहां भी आते हैं तो जनरल डॉक्यूमेंट जो है जो आपको विभाग से चाहिए सूचना अधिकार में जाकर के आपको लगता है कि टाइम ज्यादा वेस्ट होने वाला है तो आप भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 76 सेक्शन 76 में जाकर के आप संबंधित जो भी विभाग है आपका उस उसम एक आवेदन कर सकते हैं आप सादा कागज पर फॉर्मेट पर सेवा में श्रीमान लिख कर के उनसे कहिए कि मुझे यह सूचना चाहिए धारा 76 भारतीय साक्ष अधिनियम के तहत आवेदन आपको लिखना होगा और आप अपनी जो सूचना आप चाहते हैं जो कागज आप चाहते हैं व उनसे मांग लीजिए संबंधित अथॉरिटी को वह सूचना आपको तत्काल रूप से तुरंत त्वरित फास्ट रूप से आपको प्रदान करनी होगी उसी वक्त आपको प्रदान करनी होगी इसके लिए जो संबंधित शुल्क जो जो बताया गया है व पा बताया है और मैं आपको यहां बता दूं जो शुल्क है वह साधारण शुल्क है साधारण सूचनाएं मिलने में आपको एक दिन दो दिन का समय लग सकता है भारतीय न्याय व्यवस्था में व्यवस्था की गई है कि कोई भी आपको प्रतिलिपि न्यायालय से या एविडेंस एकट के तहत चाहिए तो उसके लिए आपको अर्जेंट शुल्क चुकाना पड़ेगा अगर आपको रत चाहिए तो अर्जेंट और अर्जेंट शुल्क इसका होता है जस्ट डबल यानी कि का शुल्क चुका करके आप अर्जेंट में सूचना तत्काल रूप से प्राप्त कर सकते हैं हैंड टू हैंड हाथों हाथ तो है ना कितना मजेदार है नाना आरटीआई का बाप इसीलिए इस कानून को आरटीआई का बाप कहते हैं नमित शर्मा वर्सेस यूनियन ऑफ इंडिया में सुप्रीम कोर्ट ने एक सेटल्ड लॉ बनाया साइट जारी की जिसमें उन्होंने लिखा कि इंडियन एविडेंस एक्ट के 76 सेक्शन को अगर गौर से देखा जाए तो इसमें आरटीआई की झलक दिखाई देती है जी हां माननीय सुप्रीम कोर्ट ने नमित शर्मा वर्सेस भारत सरकार में नमित शर्मा वर्सेस राज्य केस में सुप्रीम कोर्ट ने निर्धारित किया है किय जो कानून है वोह कहीं ना कहीं इसमें आरटीआई की झलक आती है क्योंकि यह कानून आपको सूचना लेने के लिए आपको मोटिवेट करता है और आपको तत्काल रूप से सूचना दिलाता है और कहीं ना कहीं आरटीआई से बहुत बेहतर कानून है आपको तत्काल रूप से सूचना दिलाता है आपको 48 घंटे इंतिहार करने की जरूरत नहीं आपको एक महीना इंतिहार करने की जरूरत नहीं आपको कमीशन जाने की जरूरत नहीं आप शुल्क दीजिए अर्जेंट शुल्क दीजिए डबल शुल्क होता है अर्जेंट केवल ₹10 और आप अर्जेंट शुल्क देकर के अपनी सूचना तत्काल रूप से अधिनियम के तहत प्राप्त कर सकते हैं यहां पर मैं आपको बता दूं सबसे बड़ी जो इसकी एक इंपोर्टेंट चीज है हम ग्राम पंचायतों से कभी-कभी आरटीआई मांगते हैं और ग्राम पंचायतों के जो सचिव होते हैं जो प्रधान होते हैं जो उनकी जो ब्लॉक्स होते हैं वह कभी-कभी हमें बड़े निराशा पूर्ण हमें जवाब देते हैं वह कहते हैं कि ग्राम पंचायतें आरटीआई के दायरे में नहीं आती हैं तो मैं य बता दूं कि उनको कानून का ज्ञान नहीं है और कानून का ज्ञान ना होने की वजह से वो आपके साथ छल कर रहे हैं फरेब कर रहे हैं आप उन्हें बता दीजिए इंडियन पैनल कोड भारतीय दंड संहिता की धारा 21 यह प्रावधान करती है यह बताती है कि कोई भी ग्राम पंचायत जो होगी भारत के अंदर वह सब जनरल प्लेसेस में मानी जाएगी वह एक ऐसा प्लेस माना जाएगा जो कानून के दायरे में आता है जो आरटीआई के दायरे में भी आएगा तो कोई भी अगर यह कहता है कि आप ग्राम पंचायतें जो हैं वो इसमें नहीं आती है आरटीआई के दायरे में या सूचना नहीं दी जा सकती या एविडेंस एक्ट के तहत सूचना नहीं दी जा सकती है तो आप उनको आईपीसी सेक्शन 21 पढ़ने की नसीहत दे दीजिए उनको पढ़ना तत्काल बहुत आवश्यक है तो आज के वीडियो में इतना ही बात तो बहुत कुछ हम कर सकते थे लेकिन बहुत लंबा वीडियो हो जाएगा आप लोगों के कमेंट्स सुझाव मैं आमंत्रित करता हूं आपको जो भी कमेंट सुझाव हो आप मुझे कमेंट बॉक्स में लिखिए मैसेज बॉक्स में लिखिए आप लोग सवाल पूछिए हम जवाब देंगे और आपको कहीं मुश्किल आएगी आप उसका हल भी हम निकाल के देंगे बहुत अच्छा कानून है बहुत अच्छा अधिनियम है ध्यान रखिए सूच लेने का सबसे फास्ट तरीका भारतीय साक्ष्य अधिनियम सेक्शन 76 आज के वीडियो में इतना ही दीजिए इजाजत मिलते हैं अगले वीडियो में बहुत जल्द तब तक के लिए जय हिंद जय भारत नमस्कार
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